ರವಿವಾರ ೫ ಫೆಬ್ರವರೀ ೨೦೦೬
टैक्सी नंबर 9211
आज ही पता चल गया, नाना पाटेकर-जॉन अब्राहम वाली नई फ़िल्म का टाइटल "टैक्सी नंबर 9211" है.

सो, कोई शक नहीं होगी कि जो भी इस नंबर देखेगा हर हिंदी-ब्लॉगरों को आलोक जी के चिट्ठे की याद ज़रूर आनी होगी.
आज तक "नौ दो ग्यारह" का मतलब पूछने की हिम्मत तक कभी हुई ही नहीं थी. फिर भी, अब इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर मैं पूछ डालूँ तो... इस अज्ञान बेचारे विदेशी भाई को ज़रा कोई बता दें?
और कुछ सोचा, शायद आलोक जी को भी उस फ़िल्म ज़रूर देखनी तो होगी...

सो, कोई शक नहीं होगी कि जो भी इस नंबर देखेगा हर हिंदी-ब्लॉगरों को आलोक जी के चिट्ठे की याद ज़रूर आनी होगी.
आज तक "नौ दो ग्यारह" का मतलब पूछने की हिम्मत तक कभी हुई ही नहीं थी. फिर भी, अब इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर मैं पूछ डालूँ तो... इस अज्ञान बेचारे विदेशी भाई को ज़रा कोई बता दें?
और कुछ सोचा, शायद आलोक जी को भी उस फ़िल्म ज़रूर देखनी तो होगी...
ಕಮೆಂಟ್ಗಳು:
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मत्सु जी नमस्कार,नौ दो ग्यारह होना एक मुहावरा है, जिससे तात्पर्य (मतलब) होता है कि लोगो के देखते देखते गायब हो जाना!
तो शायद इस टै़क्सी मे कुछ ऐसा ही गुण होगा, मतलब टैक्सी का भी फ़िल्म मे महत्त्वपूर्ण योगदान है!
तो शायद इस टै़क्सी मे कुछ ऐसा ही गुण होगा, मतलब टैक्सी का भी फ़िल्म मे महत्त्वपूर्ण योगदान है!
९, २, ११ - यानी देख कर उठ के तड़ातड़ भागने लगें, उम्मीद है कि देवनागरी की सङ्ख्याओं के जरिए समझ आ गया होगा। मुहावरा है।
अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
नो दो ग्यारह वो होते है जो बेइमान, जालसाज होते है.
काम निबटाओ और हो जाओ नो दो ग्यारह. क्यो सही है ना मित्सुभाई
काम निबटाओ और हो जाओ नो दो ग्यारह. क्यो सही है ना मित्सुभाई
आरसी जी,
आलोक जी,
पंकज जी,
अच्छा, भाइयो, आप सब लोगं की बात से मतलब समझ पाया, और ख़ासकर ९, २, ११ देखके मेरा समझ पक्का हो गया.
मुझे समझाने के लिए सबका शुक्र अदा करता हूँ.
...तो मैं भी फिर हो जाऊँ, नौ दो ग्यारह...
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आलोक जी,
पंकज जी,
अच्छा, भाइयो, आप सब लोगं की बात से मतलब समझ पाया, और ख़ासकर ९, २, ११ देखके मेरा समझ पक्का हो गया.
मुझे समझाने के लिए सबका शुक्र अदा करता हूँ.
...तो मैं भी फिर हो जाऊँ, नौ दो ग्यारह...
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