Friday, February 03, 2006

सवालात के चक्कर में...

आजकल ऐसा बहुभाषीय इंटर्नेट-फ़ोरम वाला जालस्थल देखा है...

बिलकुल-मुफ़्त अनुवाद फ़ोरमों में भारतीय भाषाओं का भी है. वहाँ कई पन्नों पे थ्रेडों के विषय देखके सोचा है, यहाँ अपने नाम देवनागरी लिपि में लिखाने-लिखवाने वालों की आशियाना-सी जगह है. ऐसे लोगों में ज़्यादातर तो सिर्फ़ जिज्ञासा से पूछते हैं, लेकिन दूसरे इरादा रखने वाले भी कम नहीं, यानी अपने बदन पे डेविड बेखम की तरह टैटू गुदवाने का.

पता नहीं, इतने टैटू वाले क्यों ???
मेरा मतलब यह नहीं है कि मैं टैटू और वह लगने वालों का ख़िलाफ़ हूँ. वैसे, जो भी चाहे या पसंद करे टैटू गुदवा लो, फ़ैशन की दृष्टि से अपने को तो अच्छा लगे तो अच्छा ही होगा.
मगर सावधान से गुदवाना..., बात गंदी सुई से लग सकती बीमारियों की नहीं, गुदने वाले अनजानी भाषाओं के अक्षरों की है, जैसे "व्हिक्टोरिया".
अगर टैटू के असली नक़्शे में लिखी गई टूटी-फूटी भाषा की या बिगड़ चुके अक्षरों की वजह से कुछ "तमाशा" सदा अपने पर रह जाए, तो अपनी नादानी से पछताओगे. वरना कहीं टैटू की ग़लती पहचानने वालों की उँगली अपनी ओर उठेगी तो...

हाँ, जैसी भी हों, विदेशों की अनजानी-अनदेखी सी अजीब चीज़ें तो कभी कभी लोगों की चाहत में आ जाती हैं. इतिहास में दुनिया ऐसे चलती आई, आजकल विदेश-यात्रा का बहुत बड़ा व्यापार हो रहा है. तो क्यों नहीं टैटू भी ?
यहाँ के शहर में ऐसों को ख़ामख़ाह मिल जाता है, जिसके बाँह-सीने या किसी अंग पे "तमाशा" नज़र आया, तो उससे हंस पड़ें या उसका मज़ाक़ उड़ा लें, क्यों नहीं ?

दरअसल मैंने देवनागरी वाले तो कभी नहीं, लेकिन चीनी-अक्षरों वाले ज़बरदस्त "तमाशे" बहुत बार देख लिए हैं. जो शब्द-अक्षर उन लोगों की नज़र में तो कुछ नया कुछ आकर्षक हो, मेरी (और शायद जो भी उसका अर्थ समझने वालों की) नज़र में वही दिखता है जैसे छोटे हबच्चों के लिखाई-अभ्यास के पाठ्यपुस्तक देख रहा हूँ. और मामला टैटू तक ही नहीं, टी-शर्ट्स या टोपी पे भी "तमाशे" की कोई कमी नहीं है.
मसलन, कभी ग़लतफ़हमी मत कीजिए, इसी न्यूयोर्क यंकीस के बेसबॉल-कैप पर जो लिखा हुआ वह तो क़तई "कानजी" (यानी जापानी भाषा का चीनी अक्षर) नहीं है . यही अक्षर दुनिया में कोई पढ़ भी नहीं सकता...

मगर अफ़सोस, इमानदारी की ख़ातिर यह भी बताना पड़ेगा कि मेरे पास भी "तमाशे" वाली टी-शर्ट है, जिसके सादे ढंग और मामूली ग्रे रंग में मोटी सफ़ेद लक़ीर से जापानी में सिर्फ़ पाँच चीनी अक्षरों का एक शब्द "天然記念物" छपा है, जिसका अर्थ है "प्राकृतिक स्मारक(-ईय जानवर)".गर्मी में जान-बूझ कर वह टी-शर्ट मज़ाक़िया तौर पे पहनना अपनी बदनसीबी शरारत से पसंद करता हूँ...


फिर बात फ़ोरम के बारे में...
फ़ोरम का हाल तो दुनिया का जैसा-तैसा है. फ़ोरम में सवाल पूछने वाले कभी कभी हिंदी और संस्कृत का फ़र्क़ भी उछाल लेते हैं, यहाँ तक कि एक ने शायद संस्कृत के लिए "Sanscript" ही लिख डाला...

लेकिन कभी एक आशा की किरण भी, जब अनुवाद से यहाँ और वहाँ के दो दिल और क़रीब हो जाते हैं. विक्रम जी के काम से फ़ोरम की कुछ अच्छाई भी समझ गया...


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