मार्च 11, 2011

क़यामत-सा दिन

भूकंप के वक़्त घर पर था और बड़ी ख़ुश क़िस्मत थी कि सब सलामत रहे हैं हमारे यहाँ तो. लेकिन लोग बेहद ख़ौफ़ज़दा रह गए हैं. इतना ज़ोरदार झटका कभी आया नहीं था कि घर के अंदर तो क्या, बाहर सब नज़ारों में दुनिया हिल रही थी.

फ़िलहाल मोबाइल वग़ैरह फ़ोन सेवा तो सुस्त या बिल्कुल बंद हो रही है. नगरपालिका की तरफ़ से घोषणा मिली है कि बिजली भी कई क़रीब शहरों में बंद हो रही है. न्यूज़ में कह रहा है कि तबतक तोक्यो राजधानी क्षेत्र में कम्यूटर ट्रेन की लाइनों पर रोक लगाई जा रहेगी जबतक ट्रेन की पटरियों पर जाँच पूरी न हो, और टीवी पर घर लौटने को इच्छुक यात्रियों की बड़ी भीड़ स्टेशनों पर लगी हुई नज़र आ रही है. ऐसा भी कह रहा है कि यह रोक आज सारी रात के लिए हटेगी नहीं, इस लिए बदले में उपलब्ध किए जाने वाली बस सेवा और टक्सी पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं.

शाम ढलते ही अँधेरा छाया और साथ ही काफ़ी ठंड हो रही है. अभी शारीरिक रूप में तो ख़ासा नुक़सान नहीं हुआ, बल्कि मानसिक तौर पर कुछ प्रभाव हो रहा है. बहुत परेशान हो जाते हैं, जैसे बार बार टीवी न्यूज़ में तटीय इलाक़ों में त्सुनामी से मची तबाहियाँ देखकर, और, अब तक न थमने वाले भूकंपोत्तर लहरों को महसूस करके.


इन दसेक सालों में भूकंप की तबाहियों के बारे में अनगिनत ख़बरें देखा करता रहा था, पर पक्के मायने में तो तसव्वुर नहीं कर पाई थी और कहीं लगता था कि अपने ऊपर ऐसा नहीं होगा. अब ऐसा एहसास तो बिल्कुल नहीं रह गया है.

2 टिप्‍पणियां:

"पलाश" ने कहा…

こんにちは、私はすぐにこの悲劇から来ることを望む。 あらゆる事は長いすである。
神の弾力性のyoの強さはかもしれない

namaste ने कहा…

पलाश जी,
दिलासा देने वाले संदेश के लिए बहुत शुक्रिया.
बहतर रहेगा, यांत्रिक अनुवाद किए बिना हिंदी या अंग्रेज़ी में आप अपना पैगाम सीधा दिया करें तो.